देश का यह राज्य कैसे संभालेगा लाखों बेरोज़गारों की वापसी का बोझ? | rest-of-world – News in Hindi

देश का यह राज्य कैसे संभालेगा लाखों बेरोज़गारों की वापसी का बोझ? | rest-of-world – News in Hindi

Corona Virus महामारी से लाखों लोग मारे जा चुके हैं और 1 करोड़ से ज़्यादा संक्रमित हो चुके हैं. इस बीच, लाखों करोड़ों लोग इस Pandemic के कहर से जूझ रहे हैं. इस साल नौकरियां जाने, रोज़गार खत्म होने (Unemployment) और पलायन होने से कई अर्थव्यवस्थाओं को बड़ा संकट झेलना होगा. ऐसे में, India के सामने एक नया संकट यह आने वाला है कि खाड़ी देशों से लाखों लोग बेरोज़गारों की तरह लौटेंगे. और यह मुश्किल केरल के लिए एक और महामारी से कम नहीं होगी.

World Bank का अनुमान है कि कम और मध्यम आय वाले देशों में 2020 में बाहर से आने वाले धन में 20% गिरावट आएगी. यह गिरावट इतिहास में सबसे बड़ी होगी क्योंकि 2009 की वैश्विक मंदी (Global Slowdown) के दौरान इसमें 5% की कमी दर्ज हुई थी. इन हालात में केरल के सामने बड़ी चुनौती इसलिए खड़ी होने वाली है क्योंकि राज्य को बाहर से आने वाली रकम की लत लग चुकी है और इसका कोई विकल्प यहां तैयार है ही नहीं. जानिए कैसे केरल के सामने एक और मुसीबत का पहाड़ टूटने वाला है.

खाड़ी देशों से अब पैसा नहीं, मायूसी आएगी
इस साल के लिए जो अनुमान लगाए गए हैं, उनके मुताबिक सिर्फ संयुक्त अरब अमीरात से भारत आने वाले धन में ही 35% की कमी आएगी और वह भी केवल दूसरी तिमाही में. यूएई गल्फ कॉपरेशन काउंसिल में बाहरी धन का सबसे बड़ा स्रोत है और भारत इसे पाने वाला सबसे बड़ा देश. हालांकि पिछले कुछ सालों में भारत में खाड़ी से आने वाले पैसे में कमी देखी गई थी लेकिन केरल में 2018 और 19 में ज़्यादा धन आया था.ये भी पढें:- COVID-19 Vaccine: अगस्त तक लॉंचिंग को लेकर WHO क्या मानता है?

केरल के सामने दोहरी मुसीबत
दूसरे भारतीय राज्यों के मुकाबले केरल के तार खाड़ी देशों से काफी पहले से और काफी गहरे जुड़े हैं. हालांकि केरल सरकार बाहर से आने वाले धन के आंकड़े सालाना नहीं देती, लेकिन फिर भी विशेषज्ञ मानते हैं कि केरल की जीडीपी का एक तिहाई हिस्सा यही है. अब केरल के सामने हालात ये हैं कि पहले थम चुकी कोविड 19 संक्रमण की लहर फिर उठान पर है और ऐसे में खाड़ी से आने वाले धन के आदी हो चुके केरल को लौटने वाले बेरोज़गारों की भीड़ को भी संभालना होगा और कोरोना के खतरे को भी.

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केरल की जीडीपी का एक तिहाई हिस्सा खाड़ी देशों से आने वाला धन माना जाता है.

केरल और खाड़ी के रिश्ते की कहानी
खाड़ी देशों पर आश्रित होने वाली केरल की अर्थव्यवस्था की कहानी 1970 के दशक में शुरू हुई थी जब केरल के लोगों ने खाड़ी में जाना शुरू किया था. 21वीं सदी आते आते केरल के करीब 15 लाख लोग खाड़ी में थे. चूंकि शिक्षा के मामले में केरल भारत का सबसे बेहतर राज्य रहा, इसलिए पाकिस्तानियों और बांग्लादेशियों के मुकाबले केरल के लोगों को काम आसानी से मिलता रहा.

दूसरी तरफ, केरल की सरकारों और कम्युनिस्ट नेताओं ने शिक्षा का तो खयाल रखा, लेकिन केरल में उद्योग धंधे संबंधी विकास को तरजीह नहीं दी. धीरे धीरे हालात ये हो गए कि खाड़ी देशों से केरल में आने वाला पैसा व्यक्तिगत तौर पर ही खर्च होता रहा. लोग बाहर से आने वाले पैसों को प्रॉपर्टी और सोना खरीदने में खर्च करते रहे और राज्य इस धन का कोई इस्तेमाल रणनीति के तहत कर ही नहीं सका.

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अब क्या बन रही है तस्वीर?
हाल में, कुवैत ने प्रवासी कोटा बिल जारी करते हुए विदेशियों को कम करने का प्रावधान किया है और ऐसे ही प्रावधान कई खाड़ी देशों में हुए हैं. साथ ही, अरब देशों में कई भारतीयों के रोज़गार छिने हैं. कुछ बिंदुओं में समझें कि क्या स्थितियां सामने हैं.

* अब खाड़ी देशों से जो लाखों लोग भारत लौटेंगे, उनमें से 5 लाख से ज़्यादा की वापसी सिर्फ केरल में होगी.
* खाड़ी देशों में जो ईएमआई या लोन देनदार हैं, वो फंसे रहेंगे. ऐसे लोग दूसरी नौ​करियों के लिए आवेदन कर रहे हैं और पिछली नौकरी से आधे वेतन पर भी काम करने को मजबूर हो रहे हैं.
* केरल सरकार के पास लौट रहे लोगों के रोज़गार के लिए कोई नीति नहीं है. हालांकि स्वरोज़गार के लिए कुछ स्कीम और छोटे लोन की व्यवस्था की है. लेकिन, यह काफी नहीं होगा.
* व्यवसाय के मौकों के मामले में केरल 29 राज्यों में 21वें नंबर पर है यानी यहां बिज़नेस के अनुकूल माहौल नहीं है. दूसरी तरफ, लौटने वाले भारतीयों के लिए बिज़नेस करना इस समय देश भर में चुनौती ही होगा.
* केरल सरकार को खाड़ी देशों में कोविड 19 के असर के तौर पर चल रहे इस घटनाक्रम और खाड़ी देशों के लोकलाइज़ेशन के बारे में बहुत कुछ पता नहीं था.

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केरल सरकार बनाम खाड़ी के केरलाइट्स
केरल की मार्क्सवादी सरकार और मुख्यमंत्री पी विजयन को एक साल से भी कम समय के भीतर विधानसभा चुनावों का सामना करना है और विशेषज्ञ मानते हैं कि खाड़ी देशों से लौटने वाली प्रवासी आबादी का वोटों पर काफी प्रभाव पड़ेगा. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट पर आधारित खबरों की मानें तो अब केरल सरकार के सामने दोहरे या तिहरे संकट से एक साथ जूझने और बेहतर आपदा प्रबंधन करने की चुनौती है.

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