सिर्फ खिलाड़ी ही नहीं घुड़सवारी लेती है घोड़े की भी कड़ी परीक्षा, जानिए इस खेल के नियम | others – News in Hindi

सिर्फ खिलाड़ी ही नहीं घुड़सवारी लेती है घोड़े की भी कड़ी परीक्षा, जानिए इस खेल के नियम | others – News in Hindi

नई दिल्ली. खिलाड़ी खुद से घोड़े पर दांव लगाता है. भारत में कई युगों से घुड़सवारी (Equestrian) की जाती रही है हालांकि वक्त के साथ-साथ उसमें भी काफी बदलाव आ चुके हैं. आज घुड़सवारी ओलिंपिक खेलों (Olympic Games) का हिस्सा है. इन खेलों घोड़े और एथलीट को कई तरीकों से जज किया जाता है. तो कैसे खेला जाता है यह खेले, कैसे तय होता है विजेता आज हम आपको इस खेल के बारे में सबकुछ बताने जा रहे हैं.

घुड़सवारी को तीन हिस्सों में बांटा जाता है. ड्रेसेज (Dressasge), क्रोस कंट्री (Cross Country) और जंपिंग (Jumping). इस तीनों राउंड में घोड़ों की क्षमता और रचानत्मकता और एथलीट के साथ उसका ताल मेल देखा जाता है. तीनों राउंड के अंको को मिलाकर ही विजेता तय किया जाता है.

ड्रेसेज
ड्रेसेज को घुड़सवारी के खेलों में सबसे कलात्मक माना जाता है और इसमें घोड़े को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलता है. यह घोड़े और एथलीट की क्षमता को दिखाने का मौका है कि वह कितने रचानात्मक है. उदाहरण के लिए, एक एथलीट की अपने घोड़े को जल्दी से किनारे करने की क्षमता, एक सरपट या तेजी से दिशा बदलने, आदेशों का पालन करना.क्रोस कंट्री

क्रोस कंट्री एक तरह का जंपिंग इवेंट होता है. इसमें एथलीट को घोड़े के साथ लड़की की बने ऑब्सटेकल के ऊपर से कूदना होता है. यह ऑब्सटेकल ज्यादातर पेड़ के तने होते हैं और इनके ठीक सामने पानी होता है. खिलाड़ी को ध्यान रखना होता है कि वह घोड़े के साथ जब पानी या लकड़ी के ऊपर से कूदे तो घोड़ा ठकराए ना. जंप की सफाई और फिर लैंडिंग के आधार पर अंक दिए जाते हैं.

जंपिग
यह खेल का आखिरी पड़ाव होता है. इस पड़ाव एक ग्राउंड में प्लास्टिक, गत्ते जैसी चीजों से ऑब्सटेकल बनाए जाते हैं. हालांकि यह क्रोस कंट्री की तरह ठोस नहीं होते और घोड़े के ठकराने से टूट जाते हैं. यहां घोड़े के कूदने की क्षमता के साथ-साथ उसकी रफ्तार को भी परखा जाता है. घोड़े के लिए ग्राउंड में एक से ज्यादा ऑब्सटेकल लगाए जाते हैं.

जर्मनी ने ओलिंपिक घुड़सवारी खेल (26 सटीक) में सबसे अधिक स्वर्ण पदक जीते हैं, जो देश की घुड़सवारी विरासत और खेल के लिए जुनून को दर्शाता है. Michael Jung ने हाल के खेलों में व्यक्तिगत आयोजन पर अपना दबदबा बनाया है, लंदन 2012 और रियो 2016 दोनों में स्वर्ण पदक जीता.

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अगले साल होने वाले टोक्यो ओलिंपिक में 20 साल बाद भारत का प्रतिनिधित्तव करने वाला एथलीट हैं. एशियाई खेलों में देश को 36 साल बाद घुड़सवारी में व्यक्तिगत पदक दिलाने वाले फवाद मिर्जा ने एक और उपलब्धि हासिल कर ली. फवाद ने क्वालिफायर में अपने ग्रुप जी में शीर्ष पर रहते हुए टोक्यो ओलिंपिक के लिए क्वालिफाई कर लिया. उन्होंने 20 साल बाद देश को ओलंपिक कोटा दिलाया.

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